आज के समय में सेक्सुअल हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ी रही है. हालांकि अभी भी सड़कों के किनारे दीवारों पर नीम-हकीमों के इश्तहार नजर आते हैं. जिनके पास इलाज के लिए जरूरी कोई डिग्री नहीं होती. यौन रोगों के इलाज करने वालों के लिए ‘सेक्सोलॉजिस्ट’ शब्द अक्सर ही सुनने को मिलता है. लेकिन क्या आपको पता है कि यह डॉक्टर कैसे बनते हैं? आगे बढ़ने से पहले यह समझना जरूरी है कि सेक्सोलॉजिस्ट बनना कोई कोई एक कोर्स करके संभव नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा मेडिकल सफर छिपा होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.
पहला कदम-एमबीबीएस डिग्री
अगर आपको भारत में सेक्सोलॉजिस्ट बनना है, तो सबसे पहले एमबीबीएस करना होगा. जैसा कि आपको पता है यह 5.5 साल का कोर्स होता है. जिसमें एक साल की इंटर्नशिप शामिल होती है. एमबीबीएस में एडमिशन के लिए नीट यूजी परीक्षा पास करनी होती है.
दूसरा कदम- पोस्ट ग्रेजुएशन
एमबीबीएस के बाद आपको मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री लेनी होगी. लेकिन विशेष ध्यान देने वाली बात है कि सेक्सोलॉजी अपने आप में कोई अलग MD/MS डिग्री नहीं है, बल्कि यह कई मेडिकल स्पेशलाइजेशन से जुड़ी हुई है. जैसे कि मानसिक और यौन समस्याओं के लिए एमडी साइकेट्री, त्वचा और यौन रोगों के लिए एमडी डर्मेटोलॉजी एंड वेनेरियोलॉजी, महिलाओं के प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य के लिए एमडी Obstetrics एंड गायनेकोलॉजी और पुरुष प्रजनन और मूत्र रोगों के लिए MCh यूरोलॉजी कोर्स होता है.
तीसरा चरण-ट्रेनिंग
पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अगला चरण है सेक्सुअल मेडिसिन या सेक्सोलॉजी में विशेष ट्रेनिंग. भारत में एम्स और CMC वेल्लोर के अलावा कुछ प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी सेक्सुअल मेडिसिन में फेलोशिप या सेक्सोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स ऑफर करते हैं. यह ट्रेनिंग एक जनरल डॉक्टर को सेक्सुअल हेल्थ एक्सपर्ट बनाती है.
